लेखक कीथ बटलर और इलस्ट्रेटर हैरी मैकलुर ने एक ऐतिहासिक ग्राफिक उपन्यास के माध्यम से एंग्लो-इंडियन समुदाय के 500 वर्षों के समृद्ध इतिहास को जीवंत कर दिया है। यह कृति वास्को डी गामा के आगमन से लेकर आधुनिक युग तक की अनकही कहानियों को संजोती है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • कीथ बटलर का नया ग्राफिक उपन्यास 'द हिस्ट्री ऑफ एंग्लो-इंडियंस' समुदाय के 500 साल के इतिहास को दर्शाता है।
  • चेन्नई के इलस्ट्रेटर हैरी मैकलुर ने इस पुस्तक के लिए विस्तृत हाथ से बने चित्र तैयार किए हैं।
  • यह पुस्तक वास्को डी गामा के 1498 में कालीकट आगमन से लेकर 2026 के कोच्चि पुनर्मिलन तक के सफर को कवर करती है।
  • एंग्लो-इंडियन इतिहास अक्सर स्कूली पाठ्यक्रमों से गायब रहा है, जिसे अब इस अनूठी विजुअल शैली के माध्यम से संरक्षित किया जा रहा है।

एंग्लो-इंडियन समुदाय, जो अपनी विशिष्ट जीवनशैली, अंग्रेजी लहजे और कॉस्मोपॉलिटन पहचान के लिए जाना जाता है, लंबे समय से भारतीय इतिहास की मुख्यधारा की पाठ्यपुस्तकों से ओझल रहा है। अब, लेखक कीथ बटलर और चेन्नई के प्रसिद्ध इलस्ट्रेटर हैरी मैकलुर ने मिलकर इस कमी को पूरा करने का बीड़ा उठाया है। कोलकाता के ऐतिहासिक डालहौजी इंस्टीट्यूट में लॉन्च किया गया उनका नया ग्राफिक उपन्यास, 'द हिस्ट्री ऑफ एंग्लो-इंडियंस', इस समुदाय की पांच शताब्दियों की यात्रा को कलात्मक रूप से प्रस्तुत करता है।

इतिहास जो मौखिक परंपराओं में जीवित था

हैरी मैकलुर के अनुसार, एंग्लो-इंडियन समुदाय का इतिहास कभी स्कूलों में नहीं पढ़ाया गया। यह इतिहास केवल परिवारों के भीतर, दादा-दादी और माता-पिता की कहानियों के माध्यम से मौखिक रूप से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचा है। बटलर का उद्देश्य इस 'लुप्त होते' इतिहास को एक ऐसे रूप में लाना है जिसे आज की युवा पीढ़ी रुचि के साथ पढ़ सके। एक ग्राफिक उपन्यास के माध्यम से, जटिल ऐतिहासिक घटनाओं को पैनलों और चित्रों में बदलकर सुलभ बनाया गया है।

500 वर्षों का महाकाव्य: कालीकट से कोच्चि तक

यह ग्राफिक उपन्यास केवल एक कहानी नहीं, बल्कि एक सभ्यता का दस्तावेजीकरण है। इसकी शुरुआत 1498 में वास्को डी गामा के कालीकट आगमन से होती है और यह 2026 में कोच्चि में आयोजित 13वें एंग्लो-इंडियन विश्व पुनर्मिलन तक विस्तृत है। एंग्लो इंक पब्लिकेशन्स द्वारा प्रकाशित यह कृति न केवल राजनीतिक परिवर्तनों को दर्शाती है, बल्कि समुदाय के सांस्कृतिक विकास, उनके पहनावे, संगीत और भोजन (जैसे विंदालू) के माध्यम से उनकी पहचान की खोज को भी चित्रित करती है।

पहचान का संघर्ष और कलात्मक अभिव्यक्ति

कीथ बटलर ने अपनी लेखन शैली में 'मैजिकल रियलिज्म' (जादुई यथार्थवाद) का उपयोग करते हुए समुदाय के अस्तित्व के संकट को दर्शाया है। उन्होंने अपने पात्रों के माध्यम से यह बताने की कोशिश की है कि कैसे एक समुदाय अपनी जड़ों से कटने पर अपनी पहचान खो सकता है। यह पुस्तक केवल इतिहास का वर्णन नहीं करती, बल्कि यह एक आह्वान है—अपनी विरासत को याद रखने और उसे दुनिया के सामने लाने का।