छत्तीसगढ़ विधानसभा ने 'छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026' पारित किया, जो देश का पहला जोखिम-आधारित व्यापार अनुमोदन प्रणाली है। यह कानून एमएसएमई के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाकर पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल माहौल तैयार करेगा।

मुख्य बिंदु

  • छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना जिसने जोखिम- और विश्वास-आधारित व्यापार अनुमोदन प्रणाली लागू की है।
  • यह विधेयक 8 राज्य विभागों की 43 सेवाओं को अपने दायरे में लाता है, जिससे 15 लाख एमएसएमई को लाभ होगा।
  • तीन-स्तरीय निगरानी तंत्र बनाया गया है, जिसमें मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और कलेक्टर शामिल होंगे।

छत्तीसगढ़ विधानसभा ने गुरुवार, 16 जुलाई 2026 को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 'छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026' को मंजूरी दी। यह विधेयक राज्य में व्यापार स्थापित करने की प्रक्रिया को सरल बनाने और अनावश्यक नौकरशाही बाधाओं को कम करने के उद्देश्य से लाया गया है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि इस कानून के साथ छत्तीसगढ़ ऐसा पहला राज्य बन गया है जो जोखिम-आधारित (risk-based) और विश्वास-आधारित (trust-based) व्यापार अनुमोदन प्रणाली को लागू करेगा।

नवाचार और लाभ

इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य व्यापार स्थापना और संचालन से जुड़ी प्रक्रियाओं को सुगम बनाना है। इसके तहत, उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को उनके आकार और जोखिम प्रोफाइल के आधार पर वर्गीकृत किया जाएगा। कम जोखिम वाले व्यवसायों को तेजी से मंजूरी मिल सकेगी, जबकि उच्च जोखिम वाली परियोजनाओं पर तकनीकी जांच और भौतिक निरीक्षण जारी रहेगा। यह व्यवस्था विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है, जो अक्सर जटिल अनुपालन प्रक्रियाओं के कारण परेशान रहते हैं।

कार्यान्वयन और निगरानी

शुरू में, यह विधेयक राज्य के आठ विभागों द्वारा प्रदान की जाने वाली 43 सेवाओं को जोखिम-आधारित ढांचे के तहत लाएगा। कार्यकारी परिषद की मंजूरी के बाद भविष्य में और अधिक सेवाओं को इसमें शामिल करने का प्रावधान है। प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए एक तीन-स्तरीय निगरानी तंत्र स्थापित किया गया है। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समितियां और जिला स्तर पर कलेक्टर इस कार्य में जुटेंगे, जो मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली परिषद के मार्गदर्शन में काम करेंगे।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

वाणिज्य और उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने विधेयक पेश किया, जिसे चर्चा के बाद आंशिक संशोधन के साथ पारित किया गया। भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने इसे एक मील का पत्थर बताते हुए समर्थन दिया। वहीं, कांग्रेस विधायक दलेश्वर साहू ने आपत्ति जताते हुए कहा कि विधेयक को व्यापक विचार-विमर्श और परामर्श के बाद ही लाना चाहिए था। इसके बावजूद, सरकार का मानना है कि यह सुधार 15 लाख से अधिक एमएसएमई को सीधे लाभ पहुंचाएगा और छत्तीसगढ़ को एक पारदर्शी और निवेश के अनुकूल गंतव्य के रूप में स्थापित करेगा।