भारत सरकार 100% इथेनॉल ब्लेंडिंग के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है, लेकिन इसके लिए फ्लेक्स-फ्यूल इंजन और दूसरी पीढ़ी (2G) के इथेनॉल का उत्पादन महत्वपूर्ण होगा।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • 100% इथेनॉल ब्लेंडिंग के लिए फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (Flex-fuel vehicles) की आवश्यकता होगी।
  • वर्तमान में इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने से बनता है, लेकिन भविष्य के लिए कृषि अवशेषों (2G इथेनॉल) पर ध्यान दिया जा रहा है।
  • CAFE III मानक 2027 से लागू होंगे, जो उत्सर्जन कम करने के लिए कड़े होंगे।
  • इथेनॉल से कार्बन उत्सर्जन कम होता है, लेकिन यह पेट्रोल की तुलना में कम ऊर्जा घनत्व वाला है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कार्बन फुटप्रिंट को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने जल्द ही 100% इथेनॉल ब्लेंडिंग प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है। यह पहल भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

इथेनॉल ब्लेंडिंग और फ्लेक्स-फ्यूल इंजन का विज्ञान

100% ब्लेंडिंग का अर्थ है शुद्ध इथेनॉल का उपयोग। हालांकि, तकनीकी रूप से एक चुनौती यह है कि इथेनॉल का ऊर्जा घनत्व पेट्रोल की तुलना में कम होता है। इसका मतलब है कि एक लीटर इथेनॉल, पेट्रोल की तुलना में लगभग 45-55% कम ऊर्जा प्रदान करता है।

वर्तमान में, अधिकांश भारतीय वाहन E20 (20% इथेनॉल मिश्रण) तक ही सीमित हैं। पूर्ण ब्लेंडिंग (E85 या E100) के लिए फ्लेक्स-फ्यूल इंजनों की आवश्यकता होती है, जिनमें संक्षारण-प्रतिरोधी (corrosion-resistant) ईंधन प्रणाली और उन्नत इंजन नियंत्रण इकाइयां (ECU) होती हैं। हालांकि टोयोटा जैसी कंपनियों ने फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल पेश किए हैं, लेकिन मारुति सुजुकी और हुंडई जैसे बड़े खिलाड़ियों द्वारा व्यापक स्तर पर इनका उत्पादन 2026-2028 के बीच अपेक्षित है।

गन्ने से कृषि अवशेषों तक का सफर

वर्तमान में भारत में इथेनॉल का मुख्य स्रोत गन्ना है। लेकिन गन्ना एक जल-गहन फसल है, जिससे पानी की कमी वाले क्षेत्रों में संकट बढ़ सकता है। इसके समाधान के रूप में, सरकार अब 'सेकंड-जनरेशन' (2G) इथेनॉल पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जो धान के पुआल और अन्य कृषि अवशेषों से बनाया जाता है। इससे न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि उत्तर भारत में पराली जलाने की समस्या का भी समाधान होगा।

CAFE III और भविष्य की चुनौतियां

सरकार 1 अप्रैल, 2027 से CAFE III (Corporate Average Fuel Efficiency) मानक लागू करने की तैयारी में है। ये मानक वाहन निर्माताओं के लिए उत्सर्जन सीमा को और सख्त कर देंगे। इथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा देने से निर्माताओं को इन कड़े मानकों को पूरा करने में मदद मिलेगी। हालांकि, बुनियादी ढांचे, भंडारण और परिवहन की तैयारी अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।