वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की अस्थिरता के कारण भारतीय शेयर बाजार सपाट बंद हुए। सेंसेक्स में मामूली बढ़त रही, जबकि निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सेंसेक्स 1.44 अंक की मामूली बढ़त के साथ 77,186.87 पर बंद हुआ।
  • निफ्टी 5.75 अंक गिरकर 24,072.75 के स्तर पर आ गया।
  • भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को सतर्क किया।
  • आईटी शेयरों में मजबूती रही, लेकिन बैंकिंग और रिलायंस जैसे बड़े शेयरों में मुनाफावसूली देखी गई।

भारतीय शेयर बाजारों में गुरुवार (16 जुलाई, 2026) को भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जिसके बाद प्रमुख सूचकांक Sensex और Nifty लगभग सपाट स्तर पर बंद हुए। बाजार की शुरुआत में तेजी देखी गई थी, लेकिन सत्र के अंत तक निवेशकों ने वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए मुनाफावसूली (profit-taking) करना बेहतर समझा।

बाजार का प्रदर्शन और प्रमुख शेयर

30 शेयरों वाला BSE Sensex मात्र 1.44 अंक बढ़कर 77,186.87 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार के दौरान, इसने 394.26 अंकों (0.51%) की शानदार बढ़त हासिल कर 77,579.69 का स्तर छुआ था, लेकिन बाद में यह गिरावट के साथ बंद हुआ। वहीं, NSE Nifty में 5.75 अंकों (0.02%) की मामूली गिरावट दर्ज की गई और यह 24,072.75 पर बंद हुआ।

शेयरों के प्रदर्शन की बात करें तो InterGlobe Aviation, HCL Technologies, और Mahindra & Mahindra जैसे शेयरों ने बाजार को सहारा दिया। हालांकि, HDFC Bank, Reliance Industries, और Axis Bank जैसे दिग्गज शेयरों में बिकवाली के दबाव के कारण बाजार की बढ़त सीमित रही।

वैश्विक कारक और आर्थिक प्रभाव

बाजार की इस सुस्ती के पीछे मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतों में अस्थिरता है। वैश्विक स्तर पर Brent Crude की कीमतों में 0.39% की गिरावट आई और यह $84.62 प्रति बैरल पर आ गया। इसके अलावा, एशियाई बाजारों में भी कमजोरी देखी गई; दक्षिण कोरिया का Kospi सूचकांक 6.37% तक टूट गया, जिसने भारतीय निवेशकों के सेंटिमेंट को प्रभावित किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा की जा रही बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता ने घरेलू बाजार में सावधानी बरतने के माहौल को जन्म दिया है। हालांकि, अमेरिकी मुद्रास्फीति (inflation) के आंकड़ों में नरमी ने ब्याज दरों को लेकर कुछ राहत दी है, जो भविष्य में बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हो सकते हैं।