वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की निरंतर बिकवाली के बीच भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 6 पैसे गिरकर 96.31 पर पहुंच गया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 6 पैसे गिरकर 96.31 के स्तर पर आ गया है।
- पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव मुद्रा बाजार में अस्थिरता का मुख्य कारण है।
- विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा भारतीय बाजारों से लगातार पैसा निकाला जा रहा है।
- कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मजबूत डॉलर ने रुपये पर दबाव बनाए रखा है।
भारतीय मुद्रा बाजार में गुरुवार को भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जहाँ भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 6 पैसे की गिरावट के साथ 96.31 के स्तर पर आ गया। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक स्थितियां अत्यंत संवेदनशील बनी हुई हैं। इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 96.28 पर खुला था, लेकिन जल्द ही दबाव में आकर यह पिछले बंद स्तर से नीचे फिसल गया।
पश्चिम एशिया संकट और भू-राजनीतिक तनाव
रुपये की इस कमजोरी के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया (West Asia) में गहराता संकट है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने वैश्विक निवेशकों के बीच अनिश्चितता पैदा कर दी है। अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और ईरान की ओर से बहरीन तथा कुवैत को निशाना बनाने वाली मिसाइल गतिविधियों ने तेल आपूर्ति और वैश्विक मुद्रा प्रवाह को प्रभावित किया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर बढ़ते खतरों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक नया जोखिम पैदा कर दिया है, जिससे डॉलर की मांग में वृद्धि हुई है।
FII बिकवाली और घरेलू बाजार का रुख
घरेलू स्तर पर, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा भारतीय इक्विटी बाजार से लगातार की जा रही निकासी रुपये के लिए एक बड़ा झटका साबित हो रही है। बुधवार को FII ने लगभग ₹735.83 करोड़ की इक्विटी बेची, जिससे बाजार में तरलता (liquidity) पर दबाव पड़ा है। हालांकि, घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक शुरुआत ने रुपये को पूरी तरह गिरने से रोकने में मदद की; Sensex 185 अंकों की बढ़त के साथ 77,400 के स्तर पर और Nifty 42 अंकों की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था।
कच्चे तेल की कीमतें और डॉलर इंडेक्स
कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता भी रुपये की कमजोरी का एक प्रमुख कारक है। Brent Crude फिलहाल $84.69 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर इंडेक्स का 100.49 के स्तर पर बने रहना यह दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर डॉलर की मांग अभी भी मजबूत है। जब तक पश्चिम एशिया में शांति बहाल नहीं होती और FII की बिकवाली पर लगाम नहीं लगती, तब तक रुपये के लिए दबाव की स्थिति बनी रह सकती है।