वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का अधिकतम लाभ उठाने के लिए उद्योग जगत के साथ बैठकें की हैं। सरकार का लक्ष्य निर्यात को $2 ट्रिलियन तक ले जाना है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- सरकार मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के बेहतर उपयोग के लिए एक विशेष योजना पर काम कर रही है।
- भारत का लक्ष्य वस्तुओं और सेवाओं के कुल निर्यात को $2 ट्रिलियन तक पहुंचाना है।
- कृषि, कपड़ा, रत्न और आभूषण जैसे प्रमुख क्षेत्रों को शुल्क-मुक्त पहुंच का लाभ मिलेगा।
- भारतीय मिशनों को विदेशों में नए अवसरों की जानकारी देने और बाधाओं को दूर करने की जिम्मेदारी दी गई है।
भारत सरकार अब अपने मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के लाभों को अधिकतम करने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार कर रही है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में विभिन्न उद्योग संघों, व्यवसायों और निर्यात संवर्धन परिषदों (EPCs) के साथ उच्च स्तरीय बैठकें की हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय कंपनियां इन समझौतों का पूर्ण लाभ उठाकर वैश्विक बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत कर सकें।
व्यापारिक विस्तार और वैश्विक पहुंच
2021 के बाद से, भारत ने मॉरीशस, ऑस्ट्रेलिया, यूएई, ओमान, न्यूजीलैंड, ईएफटीए (EFTA), यूरोपीय संघ, यूके और अमेरिका जैसे महत्वपूर्ण देशों के साथ व्यापारिक संबंध सुदृढ़ किए हैं। ये समझौते लगभग $12 ट्रिलियन के वैश्विक आयात वाले 38 देशों को कवर करते हैं। इन समझौतों के माध्यम से भारतीय कृषि, कपड़ा, रत्न एवं आभूषण, चमड़ा, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन और फार्मास्यूटिकल्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों को शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच प्राप्त हुई है।
निर्यात लक्ष्य: $2 ट्रिलियन का महत्वाकांक्षी रोडमैप
भारत सरकार का लक्ष्य आगामी वर्षों में वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात को कुल $2 ट्रिलियन (प्रत्येक $1 ट्रिलियन) तक ले जाना है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, भारत का कुल निर्यात 4.6% बढ़कर $863.11 बिलियन के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। इसमें सेवाओं के निर्यात में 8.71% की उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, जो $421.32 बिलियन रही।
गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करना
सरकार केवल शुल्क कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह 'सफाई और पादप स्वच्छता' (SPS) संबंधी अनुमोदनों के लिए भी एक रोडमैप तैयार कर रही है। इसका उद्देश्य भारतीय कृषि और मत्स्य उत्पादों के लिए वैश्विक मानक सुनिश्चित करना है। इसके लिए भारतीय दूतावासों और वाणिज्य मंत्रालय को विदेशों में बाजार की खुफिया जानकारी जुटाने और गैर-टैरिफ बाधाओं को तेजी से हल करने का निर्देश दिया गया है।
विशेषज्ञ विश्लेषण
पूर्व WTO निदेशक शिषिर प्रियदर्शी के अनुसार, भारतीय व्यवसायों को FTA को केवल शुल्क कटौती के रूप में नहीं देखना चाहिए। इसके बजाय, इसे वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Global Value Chains) में एकीकृत होने और खुद को एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में स्थापित करने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। भारत को अब 'स्मार्ट निर्यात' पर ध्यान केंद्रित करना होगा, जिसमें ब्रांडेड उत्पाद और उच्च-मूल्य वाली सेवाएं शामिल हैं।