भारत सरकार ने डीजल और विमान ईंधन (ATF) के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) को क्रमशः ₹15.5 और ₹14.5 प्रति लीटर तक बढ़ा दिया है, जबकि पेट्रोल निर्यात पर शुल्क घटाकर ₹2.5 प्रति लीटर कर दिया गया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- डीजल निर्यात पर विंडफॉल टैक्स (SAED) ₹8.5 से बढ़ाकर ₹15.5 प्रति लीटर किया गया।
- एटीएफ निर्यात पर शुल्क बढ़ाकर ₹14.5 प्रति लीटर किया गया, जबकि पेट्रोल निर्यात शुल्क घटाकर ₹2.5 प्रति लीटर हुआ।
- पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए यह पाक्षिक समीक्षा की गई है।
केंद्र सरकार ने देश में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और वैश्विक बाजार में हो रहे बदलावों को नियंत्रित करने के लिए पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स (विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क - SAED) में बड़ा बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम अधिसूचना के अनुसार, यह नई दरें 16 जुलाई, 2026 से प्रभावी हो गई हैं। इस फैसले के तहत डीजल और विमान ईंधन (ATF) पर टैक्स बढ़ाया गया है, जबकि पेट्रोल निर्यातकों को थोड़ी राहत दी गई है।
टैक्स दरों में किया गया बड़ा बदलाव
नए कर ढांचे के तहत, डीजल के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) को ₹8.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹15.5 प्रति लीटर कर दिया गया है। इसी तरह, हवाई जहाज के ईंधन यानी एटीएफ (ATF) के निर्यात पर लगने वाले टैक्स को ₹7.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर सीधे ₹14.5 प्रति लीटर कर दिया गया है। हालांकि, पेट्रोल निर्यातकों को राहत देते हुए सरकार ने इस पर निर्यात शुल्क को ₹4 प्रति लीटर से घटाकर ₹2.5 प्रति लीटर कर दिया है।
पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक संकट और विंडफॉल टैक्स
इस नीतिगत बदलाव के पीछे पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी गंभीर भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक कच्चे तेल के बाजार में अस्थिरता प्रमुख कारण हैं। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच, भारतीय रिफाइनरियां घरेलू बाजार में आपूर्ति करने के बजाय विदेशों में निर्यात कर भारी मुनाफा (Super-normal profits) कमा रही थीं। सरकार ने जुलाई 2022 में पहली बार विंडफॉल टैक्स लागू किया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि घरेलू उपभोक्ताओं को ईंधन की कमी का सामना न करना पड़े और कंपनियां देश के भीतर भी आपूर्ति बनाए रखें।
घरेलू कीमतों पर क्या होगा असर?
आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले करों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों में कमी तभी संभव होगी जब भारतीय रिफाइनरियों को लगातार सस्ता कच्चा तेल मिलता रहेगा। इस विंडफॉल टैक्स का मुख्य उद्देश्य निर्यात को हतोत्साहित करना और यह सुनिश्चित करना है कि देश के भीतर सभी पेट्रोल पंपों पर ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे।
निजी रिफाइनरियों पर पड़ेगा सीधा प्रभाव
इस फैसले का सीधा असर रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और नायरा एनर्जी जैसी प्रमुख निजी तेल रिफाइनरियों पर पड़ेगा, जो बड़े पैमाने पर यूरोपीय और एशियाई देशों में ईंधन का निर्यात करती हैं। डीजल और विमान ईंधन पर टैक्स बढ़ने से इन कंपनियों के मुनाफे के मार्जिन पर दबाव पड़ेगा, जिससे उन्हें अपनी अल्पकालिक व्यापार रणनीतियों में बदलाव करना होगा। सरकार हर 15 दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों की समीक्षा कर इन करों में संशोधन करती है।