पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण से इंजन खराब होने और माइलेज घटने की चिंताओं के बीच, केंद्र सरकार ने व्यापक परीक्षणों का हवाला देते हुए इन दावों को खारिज कर दिया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- सरकार ने कहा कि इथेनॉल मिश्रण का परीक्षण ARAI और भारतीय पेट्रोलियम संस्थान जैसे संस्थानों द्वारा किया गया है।
- कथित इंजन क्षति और माइलेज में भारी गिरावट के दावों को मंत्रालय ने निराधार बताया है।
- इथेनॉल मिश्रण से अब तक ₹1.9 लाख करोड़ से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।
- अरविंद केजरीवाल ने इस नीति को जनता पर थोपे जाने वाला 'प्रयोग' बताते हुए पीएम मोदी को पत्र लिखने की घोषणा की है।
भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blending) को लेकर चल रही बहस अब राजनीतिक मोड़ ले चुकी है। सोशल मीडिया पर लगातार यह दावा किया जा रहा है कि इथेनॉल युक्त ईंधन वाहनों के इंजन के पुर्जों को गला रहा है और माइलेज में भारी गिरावट ला रहा है। इन चिंताओं के बीच, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक विस्तृत नोट जारी कर सरकार का पक्ष मजबूती से रखा है।
वैज्ञानिक परीक्षण और सुरक्षा मानक
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इथेनॉल मिश्रण की प्रक्रिया किसी जल्दबाजी में लिया गया निर्णय नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं पर आधारित है। सरकार के अनुसार, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (देहरादून), और भारतीय तेल निगम (Indian Oil) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों ने 2014 से ही इस पर व्यापक अध्ययन किए हैं। परीक्षणों में कारों के लिए 40,000 किलोमीटर और दोपहिया वाहनों के लिए 20,000 किलोमीटर की लंबी दूरी तय की गई, जिसमें इंजन की धातु और प्लास्टिक के साथ संगतता (compatibility) की जांच की गई थी।
आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ
सरकार का तर्क है कि यह नीति न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी गेम-चेंजर साबित हो रही है। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के माध्यम से अब तक 310 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का आयात कम किया जा सका है। इससे किसानों को ₹1.6 लाख करोड़ से अधिक का भुगतान सुनिश्चित हुआ है और देश ने लगभग ₹1.9 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बचाई है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि इथेनॉल का उच्च ऑक्टेन नंबर उच्च प्रदर्शन वाले इंजनों के लिए इसे एक बेहतर ईंधन बनाता है।
राजनीतिक विरोध और जनता की चिंताएं
दूसरी ओर, विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है। आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश को एक 'प्रयोगशाला' में बदल दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जबरन लोगों पर मिश्रित ईंधन थोप रही है जिससे वाहन खराब हो रहे हैं। केजरीवाल ने इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखने की बात कही है। वहीं, राजनीतिक टिप्पणीकार तेहसीन पूनावाला ने भी इस अनिवार्य नीति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है, ताकि उपभोक्ताओं को ईंधन चुनने का विकल्प मिल सके।