विशाखापत्तनम उपभोक्ता अदालत ने बीमा कंपनी के गलत दावे को खारिज करते हुए ग्राहक को ₹2.85 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने वीडियो आधारित फॉरेंसिक रिपोर्ट को आधार मानने से इनकार कर दिया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • विशाखापत्तनम उपभोक्ता अदालत ने बीमा कंपनी और एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया।
  • कंपनी ने बिना भौतिक निरीक्षण के केवल वीडियो देखकर दावे को खारिज कर दिया था।
  • अदालत ने ₹1.62 लाख की टीवी कीमत, वारंटी राशि और ₹1 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया।
  • यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों और सेवा में कमी (Deficiency in Service) के लिए एक मिसाल है।

आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए LG Electronics India Pvt Ltd और Bajaj Allianz General Insurance सहित कई कंपनियों को एक उपभोक्ता को ₹2.86 लाख का भुगतान करने का निर्देश दिया है। यह मामला एक प्रीमियम टेलीविजन की खराबी और बीमा कंपनी द्वारा दावे को अनुचित तरीके से खारिज करने से जुड़ा है।

क्या था पूरा मामला?

शिकायतकर्ता ने साल 2019 में ₹1.62 लाख का एक टेलीविजन खरीदा था। तीन साल की मैन्युफैक्चरिंग वारंटी के अलावा, उपभोक्ता ने 2024 तक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ₹18,998 की अतिरिक्त 'एक्सटेंडेड वारंटी' भी ली थी। सितंबर 2024 में, जब टीवी की स्क्रीन पर एक मोटी वर्टिकल लाइन (खड़ी रेखा) दिखाई दी, तो उपभोक्ता ने तुरंत इसकी शिकायत की। हालांकि, बीमा कंपनी ने यह दावा करते हुए इसे खारिज कर दिया कि क्षति 'फिजिकल डैमेज' (भौतिक क्षति) के कारण हुई है, जो उनकी पॉलिसी के दायरे में नहीं आती।

अदालत ने वीडियो रिपोर्ट को क्यों नकारा?

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब बीमा कंपनी ने एक 'विशेषज्ञ फॉरेंसिक रिपोर्ट' पेश की। इस रिपोर्ट का आधार टेलीविजन का एक वीडियो था, न कि उसका प्रत्यक्ष भौतिक निरीक्षण। आयोग की अध्यक्ष गुडला तनुजा और सदस्य कृष्ण मूर्ति की पीठ ने इस रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल वीडियो देखकर कोई भी तकनीकी राय देना कानूनी या तकनीकी रूप से वैध नहीं है जब तक कि डिवाइस का भौतिक रूप से निरीक्षण न किया गया हो।

उपभोक्ता अधिकारों की जीत

अदालत ने पाया कि कंपनियां केवल अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए अस्पष्ट रिपोर्टों का सहारा ले रही थीं। आयोग ने इसे 'सेवा में कमी' (Deficiency in Service) माना। अदालत ने आदेश दिया कि कंपनियां टीवी की मूल कीमत (₹1.62 लाख), वारंटी की राशि (₹18,998) पर 7% वार्षिक ब्याज के साथ वापस करें, साथ ही मानसिक प्रताड़ना के लिए ₹1 लाख का मुआवजा और ₹5,000 कानूनी खर्च भी दें।

विशेषज्ञ विश्लेषण और निष्कर्ष

यह फैसला उन सभी उपभोक्ताओं के लिए एक चेतावनी है जो एक्सटेंडेड वारंटी खरीदते हैं। यह स्पष्ट करता है कि कंपनियां तकनीकी खामियों को 'फिजिकल डैमेज' बताकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकतीं। यदि आप भी ऐसी किसी समस्या का सामना कर रहे हैं, तो राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) पर संपर्क कर सकते हैं।