इंडिया‑यूके व्यापक आर्थिक‑व्यापार समझौता (CETA) के लागू होते ही सूरत डायमंड बोरसे में चार जौहरी कंपनियों ने यूके को अपना पहला निर्यात कंसाइनमेंट भेजा। यह कदम भारतीय रत्न‑जौहरी उद्योग को शून्य शुल्क के साथ वैश्विक मंच पर नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- इंडिया‑यूके CETA ने यूके में 4% आयात शुल्क को समाप्त किया।
- सूरत के चार जौहरी कंपनियों ने $10 मिलियन मूल्य का पहला निर्यात भेजा।
- आगामी तीन वर्षों में भारत‑यूके रत्न‑जौहरी निर्यात $2.5 बिलियन तक बढ़ने की उम्मीद।
जुलाई 15, 2026 को सूरत डायमंड बोरसे में चार प्रमुख जौहरी कंपनियों – गौरव ज्वैलर्स, रॉय डायमंड्स, शिश ज्वेल्स और पार्वती ज्वेल्स LLP – ने भारत‑यूके व्यापक आर्थिक‑व्यापार समझौते (CETA) के आधिकारिक तौर पर प्रभाव में आने के साथ ही अपना पहला निर्यात कंसाइनमेंट यूके के विभिन्न शहरों को भेजा। यह निर्यात $10 मिलियन के मूल्य वाला था, जिसमें सोने, हीरे, चांदी और प्लेटिनम से बने ज्वेलरी शामिल थे।
समझौते की प्रमुख शर्तें
India‑UK CETA ने यूके में भारतीय रत्न‑जौहरी आयात पर 4% तक के मौजूदा शुल्क को समाप्त कर दिया है, साथ ही शून्य ड्यूटी की सुविधा प्रदान की है। इस पहल से भारत के छोटे‑से‑मध्यम उद्यम (MSME) और डिजाइनर को यूके के $4 बिलियन के ज्वेलरी आयात बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा।
ऐतिहासिक निर्यात आंकड़े
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ कमर्शियल इंटेलिजेंस एंड स्टैटिस्टिक्स (DGCI&S) के आंकड़ों के अनुसार, 2023 में भारत का यूके को रत्न‑जौहरी निर्यात $164.77 मिलियन था, जो 2024 में $941 मिलियन और 2025 में $754.11 मिलियन तक बढ़ा। हीरे, सोना और प्लेटिनम‑आधारित ज्वेलरी की मांग में तेज़ी से वृद्धि देखी गई है।
उद्योग के प्रमुख आवाज़ें
ग्लोबल ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रोमोशन काउंसिल (GJEPC) के अध्यक्ष किरीट भंसाली ने कहा, “यह केवल माल की आवाज़ नहीं, बल्कि भारत के वैश्विक व्यापार यात्रा की नई शुरुआत है। शून्य‑ड्यूटी पहुंच के साथ, अगले तीन वर्षों में निर्यात $754 मिलियन से बढ़कर लगभग $2.5 बिलियन हो जाएगा।” गौरव ज्वैलर्स के मालिक गौरव लिम्बानी ने बताया कि उनका पहला कंसाइनमेंट ईस्ट लंदन के एक खरीदार को $39,000 मूल्य का है, और वे निर्यात में चार गुना वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं।
भविष्य की संभावनाएँ
विश्लेषकों का मानना है कि इस समझौते से सूरत को फिर से “विश्व का हीरा राजधानी” के रूप में स्थापित किया जा सकता है। निर्यात में वृद्धि न केवल राजस्व बढ़ाएगी, बल्कि रोजगार सृजन, तकनीकी नवाचार और कारीगरों के कौशल उन्नयन में भी योगदान देगी।