दिल्ली ट्रैफ़िक पुलिस ने 1 जुलाई से 31 जुलाई तक एक महीने की ‘ट्रैफ़िक पाठशाला’ शुरू की है, जिसमें उल्लंघन करने वालों को 15‑मिनट की जागरूकता सत्रों के माध्यम से रोड सुरक्षा के महत्व से रूबरू कराया जाएगा। यह पहल आर्थिक दंड से परे व्यवहारिक परिवर्तन की दिशा में एक कदम है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • दिल्ली में 1‑31 जुलाई तक 226 जागरूकता सत्र आयोजित किए जाएंगे।
  • सत्र में हेल्मेट न पहनना, लाल बत्ती तोड़ना, तेज़ गति आदि आम उल्लंघनों पर प्रकाश डाला जाएगा।
  • पहले ही दो महीने में दुर्घटनाओं में 30% तक कमी दर्ज की गई है।

दिल्ली ट्रैफ़िक पुलिस ने ‘ट्रैफ़िक पाठशाला’ नामक एक नया अभियान लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य ट्रैफ़िक उल्लंघनों के पीछे के सामाजिक‑व्यवहारिक कारणों को समझना और दंड के साथ‑साथ शिक्षा प्रदान करना है। 1 जुलाई से शुरू होकर 31 जुलाई तक चलने वाले इस महीने‑भर के कार्यक्रम में पुलिस अधिकारी 15 मिनट के छोटे‑छोटे सत्रों में वीडियो, चार्ट और इंटरैक्टिव चर्चा के ज़रिए सड़क सुरक्षा के मूल सिद्धांत समझाते हैं।

पृष्ठभूमि और आवश्यकता

दिल्ली में हर साल लगभग 12,000 ट्रैफ़िक उल्लंघन दर्ज होते हैं, जिनमें हेल्मेट न पहनना, लाल बत्ती तोड़ना और तेज़ गति प्रमुख हैं। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद (NSSC) के आंकड़ों के अनुसार, इन उल्लंघनों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में 40% से अधिक मौतें होती हैं। आर्थिक दंड से लेकर लाइसेंस रद्दीकरण तक के कड़े उपायों के बावजूद, व्यवहार में स्थायी बदलाव नहीं आया है, जिससे पुलिस को नई रणनीति अपनाने की ज़रूरत महसूस हुई।

कैसे काम करता है ‘ट्रैफ़िक पाठशाला’

पुलिस ने दिल्ली के प्रमुख चौराहों—जैसे श्री औरोबिंदो मार्ग, नवाज अली रोड और बबर खारक सिंह मार्ग—को चयनित हॉटस्पॉट बनाया। उल्लंघनकर्ता को रोकने के बाद, उन्हें एक छोटी सी कक्षा में बैठाया जाता है, जहाँ एक प्रशिक्षित इन्स्पेक्टर सड़क पर संभावित जोखिमों को वास्तविक जीवन के वीडियो और आँकड़ों के साथ पेश करता है। सत्र के दौरान, पादचारी, बुजुर्ग, बच्चे और पालतू जानवरों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

प्रभाव और प्रारम्भिक परिणाम

जून के अंत तक, दिल्ली ट्रैफ़िक पुलिस ने 5,600 से अधिक उल्लंघनकर्ताओं को सत्र में भाग लेने के लिए बुलाया, और 226 सत्र सफलतापूर्वक आयोजित किए। इसी अवधि में 696 गलत दिशा में चलने, 246 लाल बत्ती तोड़ने और 319 त्रिपहिया सवारी के मामलों का पता चला। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि जागरूकता सत्र न केवल दंड बल्कि रोकथाम का काम कर रहे हैं। पिछले आठ महीनों में, स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि औसत दुर्घटनाओं की संख्या 12 से घटकर 8 हो गई, जो कि सशक्त सार्वजनिक‑निजी सहयोग का परिणाम है।

आगे की राह

पुलिस ने बताया कि इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने की योजना है, जिससे अन्य महानगर भी समान शिक्षा‑आधारित ट्रैफ़िक प्रबंधन अपनाएँ। साथ ही, 330 से अधिक मोटर चालकों को “सुरक्षित चालक” बैज प्रदान कर उन्हें नियम‑पालन के लिए प्रोत्साहित किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नागरिकों की भागीदारी बढ़ती रही, तो भविष्य में ट्रैफ़िक दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी संभव है।