तेलंगाना के नारायणपेट में फसल विविधीकरण और जलवायु-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के लिए 'प्रोजेक्ट K-100' लॉन्च किया गया है। यह पहल किसानों की आय बढ़ाने और खेती को टिकाऊ बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- 'प्रोजेक्ट K-100' के तहत 100 किसान 100 अलग-अलग नवीन कृषि गतिविधियों का प्रदर्शन करेंगे।
- इसका मुख्य उद्देश्य फसल विविधीकरण और जलवायु-लचीली (Climate-resilient) खेती को बढ़ावा देना है।
- जिला कलेक्टर पी. प्रियंका ने किसानों को अल नीनो के प्रभाव से बचने के लिए सूखा-सहिष्णु फसलों की सलाह दी।
- परियोजना का लक्ष्य कोसगी डिवीजन को आधुनिक और टिकाऊ कृषि का एक मॉडल हब बनाना है।
तेलंगाना के नारायणपेट जिले में कृषि क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत करते हुए 'प्रोजेक्ट K-100' (100 किसान - 100 अभिनव गतिविधियाँ कार्यक्रम) का आधिकारिक शुभारंभ किया गया है। कोसगी मंडल के मल्लारेड्डीपल्ली गाँव में आयोजित इस कार्यक्रम का नेतृत्व जिला कलेक्टर सी. प्रियंका ने किया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य न केवल पारंपरिक खेती के तरीकों को बदलना है, बल्कि किसानों को आधुनिक तकनीकों और जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीला बनाना भी है।
प्रोजेक्ट K-100: एक अभिनव मॉडल
इस परियोजना की सबसे अनूठी विशेषता इसका 'डेमोंस्ट्रेशन मॉडल' दृष्टिकोण है। इसके तहत चुने गए 100 किसान कृषि, बागवानी (Horticulture), फूलों की खेती (Floriculture), पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में एक-एक विशिष्ट और नवीन गतिविधि को अपनाएंगे। इससे पूरे क्षेत्र में 100 जीवित प्रदर्शन मॉडल तैयार होंगे, जो अन्य किसानों के लिए सीखने का एक व्यावहारिक स्रोत बनेंगे। यह मॉडल कोसगी डिवीजन को एक ऐसे हब के रूप में विकसित करेगा जहाँ नवाचार और स्थिरता का संगम होगा।
जलवायु परिवर्तन और अल नीनो की चुनौती
वर्तमान वैश्विक जलवायु संकट और अल नीनो (El Nino) की संभावित स्थिति को देखते हुए, कलेक्टर प्रियंका ने किसानों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक फसलों पर अत्यधिक निर्भरता जोखिम भरी हो सकती है। इसके बजाय, किसानों को कम अवधि वाली फसलों, सूखा-सहिष्णु किस्मों और वैकल्पिक फसलों की ओर रुख करना चाहिए। उन्होंने जल संरक्षण के लिए खेत तालाब (Farm Ponds) बनाने और वर्षा जल संचयन पर भी जोर दिया, ताकि भविष्य में पानी की कमी से निपटने में आसानी हो सके।
आधुनिक तकनीकों का महत्व
निरीक्षण के दौरान, कलेक्टर ने मल्चिंग (Mulching) के माध्यम से बैंगन और हरी मिर्च की खेती, तथा स्टेकिंग विधि (Staking method) से टमाटर की खेती का अवलोकन किया। उन्होंने इन आधुनिक तकनीकों की सराहना करते हुए कहा कि इनसे न केवल उत्पादन बढ़ता है, बल्कि खेती की लागत में भी कमी आती है, जिससे सीधे तौर पर किसानों की शुद्ध आय में वृद्धि होती है। कार्यक्रम के दौरान किसानों को सब्जी और कपास के बीज भी वितरित किए गए, जिससे इस अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूती मिले।